ईरानी शेर और सूरज क्रांति: दशकों की तैयारी
परिचय
ईरान ने कभी भी प्रतिरोध करना नहीं छोड़ा है। 1979 की क्रांति से लेकर महसा अमिनी की मौत से भड़के 2022 के विद्रोह और 2025-2026 की सबसे भीषण कार्रवाई तक, देश ने अनगिनत जानें गंवाकर इसकी कीमत चुकाई है।
ईरान का इस्लामी गणराज्य 1979 में स्थापित हुआ था। अगले चार दशकों में, लगातार सरकारों ने फांसी, कैद और व्यवस्थित हिंसा के माध्यम से असहमति को दबा दिया।
हालांकि, उत्पीड़न कभी भी प्रतिरोध की लौ को बुझा नहीं पाया। 'ग्रीन मूवमेंट' से लेकर 'स्त्री, जीवन, स्वतंत्रता' तक, ईरानियों की हर पीढ़ी ने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस्लामी गणराज्य की स्थापना
1979 की इस्लामी क्रांति ने पहलवी राजवंश को समाप्त कर दिया और रूहुल्लाह खुमैनी को सत्ता में ला दिया। हालाँकि, इस क्रांति ने अपने उदारवादी सहयोगियों को धोखा दिया।
मोहम्मद रज़ा शाह ने अमेरिका और ब्रिटेन के समर्थन से ईरान पर शासन किया। 1979 में एक व्यापक गठबंधन ने उन्हें उखाड़ फेंका।
खुमैनी ने 'विलायत-ए फकीह' प्रणाली स्थापित की, जिससे सर्वोच्च नेता को पूर्ण अधिकार मिला। 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध ने इस शासन को और मजबूत किया।
1988 के जनसंहारों के दौरान, हजारों राजनीतिक कैदियों को गुप्त रूप से मार दिया गया। मानवाधिकार समूहों का अनुमान है कि 2,800 से 5,000 लोग मारे गए।
विरोध की लहरें: 1999 से वर्तमान तक
1979 की क्रांति के बाद से, ईरान ने कई प्रमुख विरोध प्रदर्शन देखे हैं:
मुख्य आंकड़े एक नज़र में
ये आंकड़े पत्रकारों, मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं और शोधकर्ताओं की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं। कई मामलों में, सटीक संख्या विवादास्पद है, लेकिन रूढ़िवादी अनुमान भी दिखाते हैं कि मानवीय लागत कितनी अधिक रही है।
2025–2026: आँकड़ों में कीमत
ये आंकड़े न्यूनतम अनुमान दर्शाते हैं। वास्तविक संख्या बहुत अधिक होने की संभावना है।
महिलाएं: आंदोलन का केंद्र
ईरानी महिलाएं इस संघर्ष में सबसे आगे हैं। उन्होंने 'स्त्री, जीवन, स्वतंत्रता' के नारे के साथ दुनिया को एकजुट किया है।
1979 के बाद अनिवार्य हिजाब कानून लागू किए गए। दशकों तक, महिलाओं ने चुपचाप विरोध किया।
महिलाएं विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही हैं और आंदोलन की रीढ़ बन गई हैं।
सरकार ने नए सख्त हिजाब कानून लागू किए हैं, लेकिन इसका विरोध जारी है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पश्चिमी सरकारों ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन ये काफी हद तक प्रतीकात्मक हैं।
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने लक्षित प्रतिबंध लगाए हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने जांच का आह्वान किया है।
प्रवासी ईरानियों ने वैश्विक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं और सेंसरशिप के बावजूद जानकारी साझा की है।
अब क्यों? मुख्य कारण
- 01 ईरानी रियाल का अवमूल्यन और बेरोजगारी ने आर्थिक निराशा पैदा की।
- 02 60% से अधिक आबादी 1979 के बाद पैदा हुई है, जिनका 'क्रांतिकारी आदर्शों' से कोई जुड़ाव नहीं है।
- 03 VPN के व्यापक उपयोग ने डिजिटल नेटवर्क को सक्षम किया है।
- 04 महिलाओं की शिक्षा बढ़ी है लेकिन वे व्यवस्थागत भेदभाव का सामना कर रही हैं।
- 05 पिछली कार्रवाइयों के लिए किसी अधिकारी को दंडित नहीं किया गया है।